गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड क्या है?

Dr. Shachi SinghFeb 23, 2026
Health professional performing ultrasound on a pregnant woman while her husband is with her.

गर्भवती महिला पर अल्ट्रासाउंड करते हुए डॉक्टर, जो इसकी सुरक्षा को दर्शाता है।

अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) एक जांच है जिसमें हाई‑फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स से गर्भ में पल रहे शिशु और माँ के गर्भाशय की तस्वीरें बनाई जाती हैं। यह जांच एक्स‑रे की तरह रेडिएशन का उपयोग नहीं करती, इसलिए इसे प्रेग्नेंसी में सुरक्षित माना जाता है।

अल्ट्रासाउंड से डॉक्टर:

  • शिशु की विकास दर देख पाते हैं
  • प्लेसेंटा, एम्नियोटिक फ्लूइड और गर्भाशय की स्थिति समझ पाते हैं
  • किसी भी संभावित जटिलता (कॉम्प्लिकेशन) का समय रहते पता लगा पाते हैं

क्या गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड सुरक्षित है?

अधिकांश विशेषज्ञों के अनुसार, प्रेग्नेंसी में किया जाने वाला नियमित अल्ट्रासाउंड सही तरीके से और जरूरत के अनुसार किया जाए, तो सुरक्षित माना जाता है।

सुरक्षा से जुड़े मुख्य बिंदु:

  • इसमें रेडिएशन नहीं, केवल साउंड वेव्स (ध्वनि तरंगें) इस्तेमाल होती हैंindiraivf+1
  • पिछले कई दशकों से यह जांच नियमित रूप से प्रेग्नेंसी में की जा रही है
  • प्रशिक्षित डॉक्टर/सोनोलॉजिस्ट द्वारा मेडिकल आवश्यकता के अनुसार कराया जाए तो इसे माँ और शिशु दोनों के लिए सुरक्षित माना जाता है

फिर भी, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि:

  • अल्ट्रासाउंड सिर्फ मेडिकल कारणों से कराया जाए
  • केवल जिज्ञासा या “फन/फोटो” के लिए बार‑बार स्कैन कराने से बचें
Pregnant woman looking at the sonogram image of her baby.

गर्भवती महिला अपने शिशु की सोनोग्राम छवि को देखते हुए।

प्रेग्नेंसी में अल्ट्रासाउंड क्यों जरूरी होता है?

गर्भावस्था के अलग‑अलग चरणों में अलग‑अलग कारणों से अल्ट्रासाउंड किया जाता है।

आम तौर पर इसके उद्देश्य होते हैं:

  • शिशु की धड़कन और जीवितता की पुष्टि करना
  • गर्भ में एक से अधिक भ्रूण (ट्विन, ट्रिपलेट) हैं या नहीं, देखना
  • शिशु की उम्र (गर्भकाल) और ग्रोथ मापना
  • प्रमुख अंगों का विकास (एनॉमली/लेवल‑2 स्कैन) देखना
  • प्लेसेंटा की लोकेशन, गर्भनाल और फ्लो की जांच करना
  • एम्नियोटिक फ्लूइड की मात्रा और कुछ आनुवंशिक जोखिमों का आकलन करना

प्रेग्नेंसी में कितनी बार अल्ट्रासाउंड कराना चाहिए?

कितने अल्ट्रासाउंड होंगे, यह माँ की हेल्थ, पिछला इतिहास और प्रेग्नेंसी की स्थिति पर निर्भर करता है। सामान्य, बिना जटिलताओं वाली गर्भावस्था में अक्सर सीमित स्कैन ही पर्याप्त होते हैं।

आमतौर पर:

  • सामान्य प्रेग्नेंसी में लगभग 2–5 अल्ट्रासाउंड पर्याप्त माने जाते हैं (कई जगह 3–5 बताया जाता है)
  • पहली तिमाही (लगभग 6–13 हफ्ते):
    • प्रेग्नेंसी की पुष्टि
    • शिशु की स्थिति, संख्या और गर्भकाल की सही गणनाjansatta+1
  • दूसरी तिमाही में विस्तृत एनॉमली/लेवल‑2 स्कैन
  • बाद के स्कैन जरूरत के अनुसार – जैसे ग्रोथ, फ्लूइड, डॉपलर आदिindiraivf+1

डॉक्टर की सलाह के बिना हर महीने या बार‑बार अल्ट्रासाउंड कराना जरूरी नहीं होता।

अल्ट्रासाउंड के फायदे: माँ और शिशु दोनों के लिए

सही समय पर और विशेषज्ञ की निगरानी में किया गया अल्ट्रासाउंड प्रेग्नेंसी की निगरानी के लिए बेहद मददगार होता है।

महत्वपूर्ण फायदे:

  • शिशु की ग्रोथ पर निगरानी
    • वजन, लंबाई और अंगों के विकास का मूल्यांकन
  • कम्प्लीकेशन का जल्दी पता
    • प्लेसेंटा प्रीविया, IUGR, कम/ज्यादा फ्लूइड जैसी स्थितियाँ
  • डिलीवरी की प्लानिंग
    • बेबी की पोजीशन, प्लेसेंटा की लोकेशन, कॉर्ड की स्थिति के आधार पर
  • माँ की सुरक्षा
    • पहले के सीज़ेरियन की जगह, गर्भाशय की स्थिति आदि की जांच

बार‑बार अल्ट्रासाउंड कराना सही है या नहीं?

हालांकि अल्ट्रासाउंड को सुरक्षित माना जाता है, फिर भी अनावश्यक या अत्यधिक स्कैन की सलाह नहीं दी जाती।

ध्यान रखने योग्य बातें:

  • केवल डॉक्टर की क्लिनिकल जरूरत के आधार पर ही स्कैन कराएं
  • “यादगार वीडियो/फोटो” के लिए बार‑बार स्कैन करवाने से बचें
  • हर छोटे‑मोटे संदेह पर खुद से स्कैन करवाने के बजाय पहले अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ से चर्चा करें

Health professional conducting an ultrasound while the mother observes the screen.

गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड करते हुए डॉक्टर।

अल्ट्रासाउंड से जुड़े सामान्य मिथक बनाम तथ्य

बहुत सी गर्भवती महिलाओं के मन में अल्ट्रासाउंड को लेकर डर और भ्रम रहते हैं।

कुछ आम बातें:

  • “क्या अल्ट्रासाउंड से बच्चे को नुकसान होता है?”
    • उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी और विशेषज्ञों के अनुसार, मेडिकल रूप से इंडिकेटेड, सीमित और नियंत्रित अल्ट्रासाउंड से शिशु को नुकसान होने के प्रमाण नहीं हैं।
  • “यह एक्स‑रे की तरह रेडिएशन देता है”
    • अल्ट्रासाउंड रेडिएशन नहीं, बल्कि साउंड वेव्स का उपयोग करता है, इसलिए इसकी प्रकृति अलग है।
  • “जितने ज्यादा स्कैन, उतना बेहतर चेक‑अप”
    • ज़रूरी यह नहीं कि स्कैन कितने बार हुआ, बल्कि यह कि सही समय पर, सही कारण से, सही रिपोर्ट के साथ हो।

किन बातों का ध्यान रखें?

अल्ट्रासाउंड कराते समय और उससे पहले‑बाद कुछ सरल सावधानियाँ अपनाना ज़रूरी है।

ध्यान देने लायक बिंदु:

  • हमेशा सर्टिफाइड और प्रशिक्षित डॉक्टर/सोनोलॉजिस्ट से ही स्कैन कराएं
  • रिपोर्ट हमेशा अपने गायनेकॉलजिस्ट को दिखाएं और खुद से निष्कर्ष न निकालें
  • अगर डॉक्टर अतिरिक्त डॉपलर या ग्रोथ स्कैन सुझाएं, तो उसकी वजह समझ लें
  • किसी भी असमंजस या डर की स्थिति में सीधे डॉक्टर से प्रश्न पूछें

निष्कर्ष

गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड एक महत्वपूर्ण, रेडिएशन‑फ्री और सही तरीके से इस्तेमाल होने पर सुरक्षित जांच है, जो माँ और शिशु दोनों के स्वास्थ्य की निगरानी में बड़ी भूमिका निभाती है। ज़रूरी है कि इसे सिर्फ मेडिकल आवश्यकता और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उचित संख्या में कराया जाए, ताकि किसी भी संभावित जटिलता को समय रहते पहचानकर सुरक्षित और स्वस्थ प्रेग्नेंसी की ओर कदम बढ़ाया जा सके।

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